Monday, 13 July 2026
महाराष्ट्र सरकार की महिलाओं को लुभाने के लिए लाडकी बहिन योजनागलत ● तरीके से लोगों ने हड़पे 14000 करोड़ रुपये

महाराष्ट्र सरकार की महिलाओं को लुभाने के लिए लाडकी बहिन योजनागलत ● तरीके से लोगों ने हड़पे 14000 करोड़ रुपये

महाराष्ट्र सरकार की महिलाओं को लुभाने के लिए लाडकी बहिन योजना

महिला” बन कर पुरुष ले रहे थे फ़ायदा ●  हज़ारों सरकारी कर्मचारियों ने भी लिए पैसे

गलत लोगों ने हड़पे 14000 करोड़ रुपये

भाजपा की पहचान  - भ्रष्टाचार,धोखा व जालसाजी  - कांग्रेस 

महाराष्ट्र:-   बिग बॉस इण्डिया टूडे न्यूज 

2024 में विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में महायुति की सरकार महिलाओं को लुभाने के लिए लाडकी बहिन योजना लेकर आई थी। योजना के तहत इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दिए जाने का ऐलान किया गया। बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजीत) की गठबंधन वाली सरकार के लिए चुनाव में यह योजना मास्टर स्ट्रोक साबित हुई। महायुति गठबंधन ने 288 में से 235 सीटें जीतीं। भाजपा: 132 सीटें, शिवसेना (शिंदे): 57 सीटें और एनसीपी (अजित पवार): 41 सीटें आईं। बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस सीएम बनें।

अब जानकारी सामने आ रही है कि महाराष्ट्र सरकार ने लाडकी बहिन योजना से 92 लाख महिलाओं के नाम काट दिए हैं। हर दस में से चार महिलाओं का नाम योजना से हटाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने योजना से सिर्फ 80 लाख महिलाओं के नाम हटाए जाने की बात सार्वजनिक की थी, लेकिन असर में यह आंकड़ा सरकारी दावे से करीब 12 लाख ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, नाम काटने की सबसे बड़ी वजह ईकेवाईसी यानी इलेक्ट्रॉनिक पहचान सत्यापन न होना बताया जा रहा है। सरकार के अनुसार, राज्य की करीब 62 लाख महिलाओं ने अपना ई के वाई सी नहीं कराया।

 इसके अलावा, करीब 16 लाख महिलाएं ऐसी थीं, जिनकी पारिवारिक आमदनी 2.5 लाख रुपए सालाना से ज्यादा है। लगभग साढ़े 4 लाख मामलों में परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में मिला, जबकि साढ़े 3 लाख महिलाएं पहले से संजय गांधी निराधार योजना का लाभ ले रही थीं।

सरकारी जांच में यह भी पता चला कि लगभग 29,000 पुरुषों ने भी इस योजना का पैसा लिया, जो सिर्फ महिलाओं के लिए बनी थी। इसके अलावा करीब 8,000 सरकारी कर्मचारी भी अपात्र होने के बावजूद पैसा उठाते रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना में राज्य सरकार ने करीब 14 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि योजना जून 2024 में शुरू हुई थी। उसके बाद नवंबर 2024 में विधानसभा चुनाव आ गए। आचार संहिता लागू होने की वजह से ई-केवाईसी का काम शुरू नहीं हो सका। नई सरकार बनने के बाद अगस्त 2025 में यह प्रक्रिया शुरू की गई और लोगों को 31 दिसंबर 2025 तक का समय भी दिया गया। तटकरे ने यह भी साफ किया कि पुरुषों और सरकारी कर्मचारियों के अलावा किसी और से पैसे की वसूली नहीं की जाएगी, यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद विधानसभा में बता चुके हैं।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक  ने भी 2024-25 के बजट में इस योजना को लेकर गंभीर खामियां बताई हैं। रिपोर्ट में बिना ठोस वजह के 3,541 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च और 15,586 करोड़ रुपये सरकारी खातों में बिना जरूरत के जमा रखने का जिक्र है। इसी बीच सरकार ने इस साल योजना का बजट भी 36,000 करोड़ से घटाकर 26,500 करोड़ रुपये कर दिया है, और चुनाव से पहले किया गया 2,100 रुपये मासिक सहायता बढ़ाने का वादा भी अब तक अधूरा है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने 'लाडकी बहिन योजना' के नाम पर करोड़ों रुपए का घपला किया है। सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस ने एक्स पर लिखा कि 'लाडकी बहिन योजना' के फाइनेंशियल मैनेजमेंट में कई बड़ी खामियां पाई गई हैं। इस योजना के लिए 29,693 करोड़ रुपए मंजूर थे, लेकिन सरकार ने तय बजट से 3,541 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च कर दिए। बजट से ज्यादा खर्च हुए इस 3,541 करोड़ रुपए का सरकार के पास कोई हिसाब ही नहीं है। साथ ही जब फंड की जरूरत नहीं होती थी, तब भी इस योजना के तहत पैसे निकाल लिए जाते थे। योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपए डकार जाना भाजपा सरकार का पुराना पैटर्न रहा है। साफ है- करप्शन, जालसाजी और धोखा भाजपा की पहचान बन गई है।

Published on: 13 Jul 2026

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Ramesh Mahendru
editor@bigbossindiatoday.com
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