महिला आरक्षण क़ानून और डीलिमिटेशन से जुड़ा 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में गिरा
नई दिल्ली - बी बी आई टी ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार की तरफ़ से पिछले 12 साल में ये पहली बार हुआ है जब सदन में पेश कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में गिरा हो।
सदन में दो दिन की बहस के बाद जब मतदान हुआ तो संसद में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने वाले क़ानून में संशोधन और डीलिमिटेशन से जुड़े बिलों के समर्थन में 298 मत पड़े जबकि इसके विरोध में 230 मत पड़े और लोकसभा में यह बिल 54 मतों की कमी के कारण पारित नहीं हो सका।सूत्रों का यह मानना है कि यह कोई नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की चाल थी या फिर विपक्ष को नीचा दिखाने का मौका जो नरेन्द्र मोदी छोड़ना नहीं चाहते थे। जबकि सरकार को पता ही था कि हमारे पास महिला आरक्षण बिल पास करवाने के लिए पर्याप्त बहुमत नही है तो फिर सदन में यह विधेयक लाया ही क्यों गया।
संसदीय लोकसभा क्षेत्रों की संख्या फिर से निर्धारित करने के लिए लाया जा रहा परिसीमन या डीलिमिटेशन विधेयक भी इसके साथ जुड़ा हुआ था।
सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश क़ानून (संशोधन) विधेयक भी इन दोनों विधेयकों के साथ पेश किया था. इस विधेयक का मक़सद केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन‑क़ानून व आरक्षण‑व्यवस्था को नए परिसीमन और लोकसभा‑विस्तार ढांचे से जोड़ना है।
विपक्ष का तो यह भी कहना है कि यदि भाजपा सरकार महिलाओ को इतना सम्मान देना चाहती है तो पहले 543 मौजूदा लोकसभा सीटों मे ही 33% आरक्षण महिलाओ के लिए बिल लेकर आती।
क्या कहते है संसदीय कार्य मंत्री
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया संवैधानिक संशोधन विधेयक के साथ ही दो अन्य विधेयक भी जुड़े थे, ऐसे में अब इन विधेयकों पर मतदान नहीं होगा।
किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण से जुड़े संशोशन विधेयक के सदन में गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौका गंवा दिया।