लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक
दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण 54 वोट के अंतर से गिरा
नई दिल्ली - बी बी आई टी बयंरो
2029 के चुनाव से पहले लोकसभ व राज्यसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक (131वां संविधान संशोधन विधेयक) और परिसीमन विधेयक सहित तीनों विधेयक दो तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण गिर गए।
कुल 528 वोटों में से 298 समर्थन में और 230 विरोध में पड़े, यह विधेयक पारित ना हो सका जबकि विपक्ष की सहमति ना होने के कारण 54 वोट से गिर गया। बिल पास करने हेतु 352 वोट की जरूरत थी।
परिणाम से स्पष्ट है कि महिला आरक्षण से कहीं अधिक परिसीमन को लेकर चिंता जता रहा विपक्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन के बावजूद अपने विरोध से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।
सरकार की ओर से यह समझाने की कोशिश हुई कि सीटें बढ़ेंगी तभी महिलाओं के लिए आरक्षण सही तरह से लागू हो सकेगा और सभी राज्यों में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें भी बढ़ेगी।
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में यह तक कहा गया कि वह लिखित रूप में संशोधित विधेयक के अंदर भी इसे शामिल करने को तैयार हैं। इस आश्वासन से दक्षिण के नेताओं में यह भरोसा जगता दिखा कि उनके राज्यों में सीटें बढ़ेंगी। लेकिन विपक्ष ने यह कहते हुए परिसीमन का विरोध किया कि इसकी आड़ में सीटों की संरचना में हेरफेर होगा।
विपक्ष की मंशा भांपकर प्रधानमंत्री ने पहले ही इस नैरेटिव की नींव रख दी थी कि विधेयक का विरोध करने वाले महिला विरोधी होंगे और देश की नारी शक्ति उनकी नीयत देदेखेगी उन्होंने सभी सदस्यों से स्वविवेक से वोट करने की अपली भी की थी।
दो दिनों तक चली लंबी चर्चा के बाद मत विभाजन में मोदी सरकार की ओर से प्रस्तुत विधेयक दो तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया। परिणाम घोषित होते ही विपक्षी खेमे ने मेजें थपथपाकर प्रसन्नता व्यक्त की।
इसके साथ ही पूर्व में हुए प्रयासों की तरह महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण की राह में राजनीतिक दलों के स्वार्थ और राजनीति फिर आड़े आ गई। जैसे ही 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिरा, वैसे ही सत्ता पक्ष ने विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश की।
सदन के बाहर भाजपा नेताओं ने सीधा आरोप लगाया कि कांग्रेस के कारण महिलाओं को न्याय मिलने में देर होगी। सदन के बाहर राजग की महिला सांसदों ने काली तख्ती लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़़ा किया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने सदन में ही कह दिया कि हम सभी के पास महिलाओं को आरक्षण देने के ऐतिहासिक विधेयक को पारित करने का अवसर था, लेकिन विपक्ष ने साथ नहीं दिया। माना जा रहा है कि यह चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा।