भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चर्चा के केंद्र
कोलकाता - बी बी आई टी ब्यूरो
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी जीत ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को चर्चा के केंद्र बना दिया है.
संघ लंबे समय से यह कहता रहा है कि वह चुनावी राजनीति से दूर रहता है, लेकिन बंगाल के नतीजों के बाद यह सवाल ज़ोर पकड़ने लगा है कि क्या इस बार संघ ने पर्दे के पीछे निर्णायक भूमिका निभाई। राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि बीजेपी के वैचारिक आधार माने जाने वाले संघ ने इस चुनाव में पहले से कहीं ज़्यादा सक्रियता दिखाई.
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में जहां संघ ने खुलकर मैदान में उतरने से परहेज़ किया था। लेकिन 2026 के चुनाव में उसने अपने सहयोगी संगठनों के साथ ज़मीनी स्तर पर पूरी ताक़त झोंक दी।
संघ प्रचारक का कहना है कि इस बार के चुनाव में आरएसएस से जुड़े सैकड़ों स्वयंसेवक और कार्यकर्ता एक ही संदेश के साथ गली‑गली पहुंचे कि यह चुनाव बंगाल के हिंदू समाज के "अस्तित्व" से जुड़ा है।संघ की बुनियादी इकाई मानी जाने वाली 'शाखाएँ' उसकी सबसे बड़ी ताक़त मानी जाती हैं. पश्चिम बंगाल में इस समय संघ की क़रीब साढ़े चार हज़ार शाखाएँ सक्रिय हैं. दस साल पहले यह संख्या एक हज़ार के आस-पास थी.
कोलकाता की शाखा के स्वयंसेवकों का कहना है कि संघ का काम लोगों को अपने मताधिकार के प्रति जागरूक करना और राष्ट्रहित की बात करना है। न कि किसी ख़ास पार्टी का करना। प्रचारक सीता राम डागा कहते हैं, "हमारा इंटरेक्शन ये रहता है कि जो देश के हित के लिए काम करे, जो राष्ट्र हित के लिए काम करे, जो हिंदुत्व के लिए जो काम करे, जो समाज की सेवा का काम करे आप उन्हें चुनिए."
"हम ये नहीं कहते है की आप बीजेपी को चुनिए लेकिन चूँकि संघ के स्वयंसेवक बीजेपी में भी है तो उनसे थोड़ा इंटरेक्शन होता रहता है. ये लोगों को मालूम है तो लोग कुछ समझ जाते हैं लेकिन हम लोग अपने नाम से ऐसा प्रचार नहीं करते हैं."