Monday, 5 October 2026
155 साल बाद कनाडा में बसे परिवार ने खोज निकाली पूर्वजों की जन्मभूमि

155 साल बाद कनाडा में बसे परिवार ने खोज निकाली पूर्वजों की जन्मभूमि

155 साल बाद कनाडा में बसे परिवार ने खोज निकाली पूर्वजों की जन्मभूमि

बलिया पहुंचकर भावुक हुए वंशज

बलिया - बिग बॉस इण्डिया टूडे न्यूज 

करीब 155 साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में बलिया से कलकत्ता और फिर कनाडा जा बसे एक परिवार की चौथी पीढ़ी ने आखिरकार अपने पूर्वजों की जन्मभूमि खोज निकाली। पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन अपनी जड़ों और जन्मभूमि को देखने की इच्छा परिवार के दिल में बनी रही।

इस भावनात्मक खोज की कड़ी वर्ष 1871 के एक पुराने इमिग्रेशन पेपर से जुड़ी, जिसे परिवार ने पीढ़ियों से संभालकर रखा था। दस्तावेज में अंग्रेज अधिकारी के हस्ताक्षर और पता दर्ज था। इसी पुराने दस्तावेज को आधार बनाकर स्थानीय स्तर पर करीब 15 दिनों तक खोजबीन की गई और आखिरकार परिवार के पूर्वजों का गांव खरहरा ग्राम पंचायत के बेलौना टोला में मिल गया।

कनाडा के टोरंटो निवासी 75 वर्षीय इम्तेज और उनकी पत्नी वर्ना अलाय अपने पूर्वजों की जन्मभूमि की तलाश में बलिया पहुंचे। खरहरा ग्राम पंचायत के पंचायत सचिव मिथिलेश कुमार पांडेय ने पुराने दस्तावेज के आधार पर उनकी मदद की और उन्हें उनके पूर्वजों के गांव तक पहुंचाया।

इम्तेज के अनुसार, उनके परिवार की परदादी सोमेरिया, उनकी बहन मुराचिया और उनके भाई कौल यहां से कोलकाता गए थे। इसके बाद वर्ष 1871 में उनके परिवार के सदस्य को गिरमिटिया मजदूर के रूप में कलकत्ता से कनाडा भेजा गया। उस समय उनकी उम्र महज 14 वर्ष थी। परिवार के अन्य भाई-बहनों की उम्र करीब 10 और 8 वर्ष बताई जाती है।

उस दौर की यादों से जुड़ा 1871 का पुराना पर्चा परिवार ने पीढ़ियों से संभालकर रखा। यही दस्तावेज उनकी जड़ों तक पहुंचने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बना।

करीब 15 दिनों की खोजबीन के बाद जब परिवार खरहरा ग्राम पंचायत के बेलौना टोला पहुंचा तो उनकी वर्षों पुरानी तलाश पूरी हुई। जन्मभूमि की मिट्टी पर कदम रखते ही उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। हालांकि उन्हें अपने पूर्वजों का घर नहीं मिल सका और न ही परिवार का कोई सदस्य वहां निवास करता मिला।

कनाडा से आए वंशजों ने पूर्वजों की धरती और गांव की गलियों को देखा तो वे भावुक हो उठे। भाषा की दूरी के बावजूद ग्रामीणों से मिलने और अपनी जन्मभूमि को देखने का उनका उत्साह देखते ही बन रहा था।

अपनी जड़ों की तलाश में की गई यह यात्रा उनके लिए सिर्फ एक गांव की खोज नहीं, बल्कि 155 वर्षों के इतिहास और अपनी पारिवारिक विरासत से दोबारा जुड़ने का भावुक अवसर बन गई। वहीं ग्रामीणों के लिए भी कनाडा से अपने पूर्वजों की तलाश में आए परिवार का गांव पहुंचना कौतूहल और आत्मीयता से भरा अनुभव रहा।

Published on: 05 Oct 2026

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Ramesh Mahendru
editor@bigbossindiatoday.com
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