Friday, 10 April 2026
खुलेआम धमकी से सीजफायर तक: ईरान युद्ध

खुलेआम धमकी से सीजफायर तक: ईरान युद्ध

खुलेआम धमकी से सीजफायर तक: ईरान युद्ध पर ट्रंप का 'पाषाण प्लान' फेल

नई दिल्ली - चीफ ब्यूरो 

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में दो हफ्ते के ठहराव के बावजूद, डोनल्ड ट्रंप की युद्ध रणनीति पर सवाल उठने शुरू हो चुके है और ईरान के बीच जारी तनाव में भले ही दो हफ्ते का ठहराव आ गया है। खास बात यह है कि अब सिर्फ युद्ध विरोधी ही नहीं, बल्कि जंग का समर्थन करने वाले लोग भी ट्रंप की रणनीति को लेकर असहज नजर आ रहे हैं।

डोनल्ड ट्रंप ने अपनी तय समयसीमा खत्म होने से करीब 90 मिनट पहले ईरान पर बमबारी रोकने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से खोलता है, तो अमेरिका दो हफ्ते तक हमले नहीं करेगा। हालांकि, इस फैसले से पहले ट्रंप के बयान काफी सख्त थे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो 'पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है', 

अब पश्चिमी देशों के प्रभावशाली वर्ग में भी यह भावना बढ़ रही है कि यह जंग सही दिशा में नहीं जा रही। यहां तक कि जो संस्थान पहले इस जंग का समर्थन कर रहे थे, उन्होंने भी अब चिंता जतानी शुरू कर दी है कि कहीं आम नागरिकों को ज्यादा नुकसान न हो।

इस जंग का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई में बाधा से वैश्विक बाजार प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो यह 1970 के दशक जैसी आर्थिक स्थिति पैदा कर सकता है, जिसमें महंगाई और आर्थिक सुस्ती दोनों बढ़ते है।

Published on: 10 Apr 2026

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Ramesh Mahendru
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