Friday, 17 April 2026
हाथरस की राजपुर ग्राम पंचायत की प्रियंका तिवारी को श्रेष्ठ प्रधान सम्मान

हाथरस की राजपुर ग्राम पंचायत की प्रियंका तिवारी को श्रेष्ठ प्रधान सम्मान

गांव को बनाया कचरे से कमाई का मॉडल 

हाथरस की राजपुर ग्राम पंचायत की प्रियंका तिवारी को श्रेष्ठ प्रधान सम्मान

हाथरस - बिग बॉस इंडिया टूडे ब्यूरो 

हाथरस की राजपुर ग्राम पंचायत की प्रधान प्रियंका तिवारी ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और ‘कचरे से कंचन’ का मॉडल अपनाया है। इस तरह, उन्होंने गांव में स्वच्छता के साथ-साथ आय बढ़ाने और बचत का नया रास्ता खोल दिया है। उन्हें श्रेष्ठ प्रधान सम्मान की बचत वीर श्रेणी में सम्मानित किया गया  हाथरस जिले की राजपुर ग्राम पंचायत की प्रधान प्रियंका तिवारी ने गांव के विकास के लिए ऐसा मॉडल अपनाया है, जिससे स्वच्छता के साथ-साथ पंचायत की आय और बचत भी बढ़ रही है। उनके प्रयासों से स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की गई। इस यूनिट में बेकार प्लास्टिक को इकट्ठा कर प्रोसेस किया जाता है। जिससे गांव साफ-सुथरा रहता है और प्रोसेस्ड प्लास्टिक को बेचकर पंचायत को आमदनी भी होती है।

प्रधानगी के चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रियंका ने सीमित संसाधनों के बावजूद अलग-अलग विभागों से संपर्क किया और योजनाओं की जानकारी जुटाई। इसके बाद, उन्होंने चरणबद्ध तरीके से विकास कार्य शुरू किया। गांव में 24 लाख रुपये की लागत से अंत्येष्टि स्थल, 17.5 लाख रुपये से हाईटेक पंचायत भवन और सिंचाई विभाग की मदद से 16 लाख रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया गया।

प्रियंका तिवारी के गांव के विकास के मॉडल से स्वच्छता सुधरी है, पंचायत की आय और बचत भी बढ़ रही है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिले 16 लाख रुपये से प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट को स्थापित किया गया। गांव में घर-घर कूड़ा इकट्ठा करने की व्यवस्था की गई है। जिसके लिए शुल्क निर्धारित है। इससे पंचायत को नियमित आय होती है। इकट्ठा किए गए प्लास्टिक को प्रोसेस कर ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को बेचा जाता है,। जिसका उपयोग सड़क निर्माण में किया जाता है। वर्तमान में लगभग 3 टन श्रेडेड प्लास्टिक की मांग को पूरा करने के लिए काम चल रहा है।

प्रियंका तिवारी का कहना है कि पंचायत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल पर काम कर रही है। इसके तहत मल्टी-लेयर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है, जिसमें प्रोसेस्ड प्लास्टिक से बाल्टी, टब, मग और टेबल जैसी उपयोगी वस्तुएं बनाई जा सकती हैं। इसके लिए भी 16 लाख रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है।

गांव में पशुओं के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है, जिससे हजारों रुपये की आय होती है। पंचायत में सोलर लाइटें लगवाई गई हैं और सरकारी स्कूल के विकास के लिए भी कई कार्य किए गए हैं। इन सभी प्रयासों से राजपुर पंचायत आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है।

Published on: 17 Apr 2026

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Ramesh Mahendru
editor@bigbossindiatoday.com
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