लोकसभा की मौजूदा 543 सीटें हैं, तो इन्हीं में 33% महिला आरक्षण क्यों नहीं लागू किया - प्रियंका गांधी
नई दिल्ली - बी बी आई टी ब्यूरो
प्रियंका ने राहुल का जिक्र करते हुए कहा कि संसद में अक्सर उनका मजाक उड़ाया जाता है, लेकिन उनके मुताबिक जब गंभीर मुद्दों पर विचार होता है तो उन्हीं बातों पर ध्यान दिया जाता है।
महिला आरक्षण विधेयक पर संसद के विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने केन्द्र सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए और प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को लेकर “जल्दबाजी” में काम कर रही है और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करने की कोशिश की जा रही है, जो उचित नहीं है। उनके मुताबिक इतने बड़े बदलाव के लिए ठोस और अद्यतन आंकड़ों की जरूरत होती है.
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि संसद के 50% विस्तार का प्रस्ताव तो सामने आया है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा।
प्रियंका गांधी ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि एक तरफ ओबीसी वर्ग के हितों की बात की जाती है,,लेकिन दूसरी ओर उनके अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है. प्रियंका गांधी का बयान यह दिखाता है कि विपक्ष महिला आरक्षण के समर्थन के साथ-साथ इसके लागू होने की प्रक्रिया, टाइमिंग और संबंधित मुद्दों जैसे परिसीमन और प्रतिनिधित्व पर सवाल उठा रहा है.
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सरकार पर और तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी “घबराए हुए” हैं, क्योंकि नई जनगणना होने पर ओबीसी वर्ग के वास्तविक आंकड़े सामने आ जाएंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करने की कोशिश करके सरकार ओबीसी वर्ग का हक छीनना चाहती है और जनता की “आंखों में धूल झोंकने” का काम कर रही है.
प्रियंका गांधी ने असम में हुए परिसीमन का हवाला देते हुए कहा कि वहां मनमाने तरीके से सीमांकन किया गया, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं. उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर प्राचीन रणनीतिकार आज जिंदा होते, तो वे भी इस स्थिति को देखकर चौंक जाते.
प्रियंका गांधी ने यह भी पूछा कि जब लोकसभा की मौजूदा 543 सीटें हैं, तो इन्हीं में 33% महिला आरक्षण क्यों नहीं लागू किया गया। उनके मुताबिक, इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को बीजेपी ने “सत्ता बनाए रखने का हथकंडा” बना दिया है. उनका बयान यह दर्शाता है कि विपक्ष महिला आरक्षण के उद्देश्य का विरोध नहीं कर रहा, लेकिन उसके लागू करने के तरीके, टाइमिंग और राजनीतिक मंशा पर गंभीर सवाल उठा रहा है.