बिहार की राजनीति में गहराया सस्पेंस, निशांत के फैसलों ने बढ़ाए सवाल
पटना - ब्यूरो चीफ
बिहार की राजनीति इस समय एक बेहद दिलचस्प और रहस्यमय दौर से गुजर रही है। खासकर निशांत कुमार द्वारा उपमुख्यमंत्री पद की शपथ न लेना और इस जिम्मेदारी से दूरी बनाना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। जहां एक ओर उन्हें एक संभावित बड़े चेहरे के तौर पर देखा जा रहा था, वहीं उनका यह फैसला राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका रहा है।
इसी के साथ मंत्रिमंडल विस्तार को पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद तक टालने की चर्चा ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी उलझा दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए समय लेकर बड़े फैसलों की तैयारी की जा रही है। वहीं, कुछ लोग इसे अनसुलझी पहेली मान रहे हैं, जिसमें कई अंदरूनी समीकरण छिपे हो सकते हैं।
माना जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे जातीय संतुलन, संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की चुनावी रणनीति जैसे कई अहम पहलू जुड़े हो सकते हैं। अब सभी की नजर आने वाले दिनों पर टिकी है, जब इन फैसलों के पीछे की असली तस्वीर साफ होगी और बिहार की राजनीति की दिशा तय होगी।
शपथ ग्रहण समारोह में भाजप के कई बड़े चेहरों का गायब रहना भी सरकार का कटहरे में खड़ा कर रहा है। जबकि शपथ ग्रहण समारोह में राजद के सांसदो की उपस्थिति भी विवादों को जन्म दे सकती है।