रिजर्व बैंक कागज की जगह प्लास्टिक के नोट लाने पर कर रहा है विचार
नई दिल्ली - बी बी आई टी डेस्क
भारतीय रिजर्व बैंक अब भारत में कागज की करेंसी की जगह प्लास्टिक की करेंसी छापने पर विचार कर रहा है। प्लास्टिक करेंसी बाजार में आई तो इसके काफी फायदे होंगे। प्लास्टिक नोट पानी से खराब नहीं होते, फटते नहीं और ज्यादा मजबूत होते हैं. दुनिया भर में ऐसे नोट पारंपरिक कागजी नोटों के मुकाबले 4 से 5 गुना ज्यादा चलते हैं.
₹200 का नोट अभी छपाई के लिहाज से सबसे महंगे कागजी नोटों में से एक है. इसकी लागत लगभग ₹2.93 प्रति नोट है. वहीं प्रोडक्शन खर्चे में हालिया कटौती के बाद ₹500 का नोट छापने में लगभग ₹2.29 का खर्च आता है. जबकि ₹10 का नोट छापने में लगभग ₹1.01 का खर्च आता है. ₹20 का नोट छापने में लगभग ₹1 प्रति नोट का खर्च आता है. इसी के साथ ₹50 का नोट छापने में लगभग ₹1.22 का खर्चा आता है. वहीं ₹100 के नोट की लागत प्रोडक्शन की खासियत के आधार पर ₹1.20 से ₹1.51 के बीच होती है.
पॉलीमर नोट कपास आधारित कागज के बजाए एक खास पॉलिप्रोपाइलीन प्लास्टिक सबस्ट्रेट का इस्तेमाल करके बनाए जाते हैं. इन नोटों में खूबियां भी होती है. जैसे पारदर्शी खिड़की, अंदर लगे होलोग्राफिक तत्व और सुरक्षा के खास एडवांस्ड परतें. पॉलीमर नोटों के प्रोडक्शन की शुरुआती लागत आम कागजी नोटों की तुलना में लगभग 2 से 3 गुना ज्यादा होने का अनुमान है. अगर अभी एक कागज के नोट को छापने में ₹1 से ₹3 का खर्च आता है तो पॉलीमर नोट को छापने में शुरू में हर नोट पर ₹2 से ₹6 तक का खर्चा आ सकता है।