Tuesday, 9 June 2026
करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करना होगा। उन्हें भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा - राष्ट्रपति

करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करना होगा। उन्हें भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा - राष्ट्रपति

करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करना होगा। उन्हें भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा - राष्ट्रपति

नई दिल्ली - बिग बॉस इंडिया टूडे न्यूज 

वर्तमान में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों ने हमारे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जब देश विकास के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है, तो अधिकारियों से अपेक्षाएं भी अधिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध क्षेत्रों में काम करने का अनूठा अवसर मिलेगा। कई अवसरों पर वे विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञों की टीमों का नेतृत्व करेंगे। इसलिए, उनके सीखने का दायरा और गति बहुत व्यापक तथा त्‍वरित होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की उनकी क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों की निष्पक्षता उनकी न्यायसंगतता का सूचक होगी। उनकी संवेदनशीलता समावेशिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मापदंड होगी। उनकी विश्वसनीयता उनकी पारदर्शिता और निरंतर निष्पादन पर आधारित होगी। उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक आचरण से निर्धारित उनकी सत्यनिष्ठा उन्हें जनहित में निर्णायक कार्रवाई करने का नैतिक साहस प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण करना होगा। उन्हें भावुक हुए बिना संवेदनशील होना होगा। उन्हें नियमों का पालन करना होगा, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को भूलना नहीं होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अधिकारियों को ईमानदार और नैतिक होना चाहिए। साथ ही, उन्हें परिणाम भी देने होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है बल्कि, जनहित और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही नैतिकता का सच्चा सार है। जिस प्रकार न्याय मिलने में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी भी लोगों को उनके वैध हितों से वंचित करने के समान है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र का उद्देश्य जनता की आकांक्षाओं को साकार करना है। ये आकांक्षाएं उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त की जाती हैं। इसलिए, अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे जनता के हित में इन प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि बहती धारा के साथ बहते रहने में कोई मेहनत नहीं लगती। 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने और हमारे समाज को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को अक्सर विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे भारत की जनता, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों को, अपने विचारों और कार्यों के केंद्र में रखें, चाहे वे क्षेत्र में हों या कार्यालय में। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।

Published on: 21 May 2026

Author Info

Ramesh Mahendru
editor@bigbossindiatoday.com
9592029111