भूमी अधिग्रहित 1.63 करोड़ घोटाला - एस डी एम अनुप्रीत कौर रंधावा गिरफ्तार
गुरदासपुर - बिग बॉस इंडिया टूडे न्यूज
पंजाब सिविल सर्विसेज अधिकारी अनुप्रीत कौर रंधावा को पंजाब में नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में कथित 1.63 करोड़ रुपये के गबन मामले में गिरफ्तार किया गया।
एस डी एम रंधावा, जो वर्तमान में गुरदासपुर में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हैं, को आज सुबह करीब 7 बजे उनके सरकारी आवास से पट्टी पुलिस ने हिरासत में लिया। यह मामला जम्मू-कश्मीर-राजस्थान हाईवे प्रोजेक्ट, जिसे अमृतसर-बठिंडा एक्सप्रेस हाईवे कॉरिडोर भी कहा जाता है, के लिए भूमि अधिग्रहण मुआवजे के कथित फर्जी वितरण से जुड़ा है।
यह कथित घोटाला तब सामने आया जब तत्कालीन एसडीएम पट्टी नवराज सिंह बराड़ ने तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर प्रदीप सभरवाल के समक्ष अनियमितताओं की शिकायत की। जांच में पाया गया कि 1.63 करोड़ रुपये का मुआवजा पांच ऐसे लोगों को ट्रांसफर किया गया था, जो न तो जमीन मालिक थे और न ही केंद्र सरकार द्वारा जारी भूमि अधिग्रहण अधिसूचना में उनके नाम शामिल थे।
जांच में जिन लाभार्थियों की पहचान हुई, उनमें मनांवाला की जसबीर कौर, फतेहपुर अल्गों की राजविंदर कौर, कोट दोसांधी मल्ल के सरताज सिंह, अमृतसर के बिक्रमजीत सिंह और गुरजीत कौर शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच के बाद 5 सितंबर 2019 को पट्टी सिटी पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 47 दर्ज की गई। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 409 और 120-बी के तहत दर्ज किया गया, जो धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं। एफआईआर के अनुसार, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में यह उल्लेख नहीं था कि आरोपियों की कोई जमीन नेशनल हाईवे-54 के लिए अधिग्रहित की गई थी। जांचकर्ताओं ने पाया कि पट्टी सब-डिवीजन के छह गांवों — टटला, हरीके, नत्थूपुर, बूह, मरहाना और जौनेके — में भूमि अधिग्रहण संबंधी केंद्र सरकार की 2013 की गजट अधिसूचना में भी इन पांचों के नाम शामिल नहीं थे।
जांच में यह भी सामने आया कि मुआवजे की राशि तत्कालीन एसडीएम अनुप्रीत कौर रंधावा के हस्ताक्षर वाले अनुमोदनों के आधार पर जारी की गई थी। अधिकारियों का आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड का उचित सत्यापन किए बिना राशि ट्रांसफर कर दी गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुहु।
उसके बाद डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई, जिसने विस्तृत जांच की। रिपोर्ट पंजाब सरकार को सौंपे जाने के बाद तत्कालीन पंजाब मुख्य सचिव करन अवतार सिंह ने रंधावा को निलंबित करने के आदेश दिए थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की आगे की जांच जारी है।