एक कामयाब महिला की संघर्ष भरी कहानी
सफाई सेविका से लेकर सहायक जनरल मेनेजर तक का सफर
रमेश महेन्द्र की विशेष रिपोर्ट
यह कहानी है प्रतीक्षा टोंडवलकर की । जो देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक में सफाईकर्मी के पद पर भर्त होती है और उसे तब 65 रुपये पगार मिलती है। वह अपनी कड़ी मेहनत व संघर्ष से उसी बैंक में सहायक महाप्रबंधक के पद पर पहुंच जाती है। प्रतीक्षा की जीवन किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है और लाखों लोगो खासतौर पर महिलाओ को प्रेरित करने वाला है।
परिवार में अत्यंत घरीबी के कारण प्रतीक्षा का 17 साल की उम्र में शादी हो जाती है और फिर 20 वर्ष की उम्र में विधवा हो जाती है। उसने अपने जीवन में बहुत ही दुख झेले, परन्तु कभी हार नहीं मानी और फिर उसने वह कर दिखाया जो उसके लिए मुमकिन नहीं था।
प्रतीक्षा की शादी 17 साल की उम्र में सदाशिव कडू से हो गई थी। माता-पिता की आर्थिक तंगी के कारण वह अपनी 10वीं कक्षा की परीक्षा भी पूरी नहीं कर पाई थीं। सदाशिव मुंबई में स्टेट बैंक में बुकबाइंडर के तौर पर काम करते थे। जब यह परिवार गांव जा रहा था,तब एक दुर्घटना में सदाशिव की मौत हो गई। इससे 20 साल की उम्र में ही प्रतीक्षा को अपने गुजारे के लिए संघर्ष करना पड़ा। यह बात 1985 की है।
मुंबई की रहने वाली प्रतीक्षा ने 1985 में केवल ₹65 के मासिक वेतन पर बैंक में झाड़ू-पोछा करने का काम शुरू किया था, और 37 वर्षों की कड़ी मेहनत व पढ़ाई के बाद वह एक अधिकारी बनीं। प्रतीक्षा टोंडवलकर ने शिक्षा और दृढ़ संकल्प: काम के साथ-साथ उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। 10वीं पास की, और फिर स्नातक पूरा किया। प्रमोशन का सफर स्वीपर से मैसेंजर, फिर क्लर्क, और बाद में आंतरिक परीक्षा पास करके ट्रेनी ऑफिसर बनीं। 37 साल की सेवा के बाद, वह बैंक में असिस्टेंट जनरल मैनेजर के उच्च पद तक पहुंचीं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत से विपरीत परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। अब प्रतीक्षा 58 वर्ष की हो चुकी है और 37 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने जा रही है।
बिग बॉस इंडिया टूडे प्रतीक्षा के जज्बे को सलाम करता है,उसने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बलबूते वोह कर दिखाया जो नामुमकिन था।उसने साबित कर दिया कि इन्सान अपनी हथेली की किस्मत की लकीर भी आप खींच सकता है।
सन 1964 में महाराष्ट्र के एक बेहद निम्नवर्गीय परिवार में प्रतीक्षा का जन्म हुआ. 17 वर्ष की उम्र में शादी हो गई. और फिर उनके घर एक बेटे ने जन्म लिया।. प्रतीक्षा की उम्र तब सिर्फ 20 साल थी. शादी को चार साल हुए थे. अब वो एक नन्ही जान के साथ इस महानगर में बिलकुल अकेली थी. प्रतीक्षा को कुछ काम की तलाश थी. पति की मौत के बाद बैंक से कुछ पैसे मिले थे. वो पैसे लेने के लिए कई बार बैंक जाना होता। प्रतीक्षा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में स्वीपर का काम करने प्रतीक्षा ने दोबारा पढ़ाई शुरू करने की ठान ली. बैंक की नौकरी, बच्चे की देखभाल और घर के कामकाज निपटाने के बाद पढ़ाई की और दसवीं की परीक्षा पास कर ली. लेकिन बैंक में नौकरी पाने के लिए दसवीं पास करना काफी नहीं था. फिर उन्होंने विक्रोली के एक कॉलेज में बारहवीं में दाखिला लिया और अपनी अनथक मेहनत से 12वीं की परीक्षा भी पास कर ली. यह 1995 का साल था। उसके बाद प्रतीक्षा को बैंक में क्लर्क की नौकरी लग गई. उन्होंने वहीं उसी बैंक में मैसेंजर का काम करने वाले प्रमोद तोंडवलकर से शादी कर ली। प्रतीक्षा ने खूब मेहनत से काम किया और अनथक लगन और मेहनत से साल दर साल खुद को साबित भी किया.
समय तेजी की रफतार से आगे बढ़ता गया और प्रतीक्षा एक के बाद एक प्रमोशन पाकर आगे बढ़ती गईं और अंत में असिस्टेंट जनरल मैनेजर के पद तक पहुंच गईं.।अब उनकी नौकरी समाप्त हो रही है।