Sunday, 21 June 2026
पंजाब में 3000 करोड़ का जी एस टी घोटाला का पर्दाफाश

पंजाब में 3000 करोड़ का जी एस टी घोटाला का पर्दाफाश

पंजाब में 3000 करोड़ का जी एस टी घोटाला का पर्दाफाश 

ई डी की बड़ी कारवाई ● 5 व्यापारियों सहित सी ए पर एफ आई आर 

लुधियाना - बी बी आई टी डेस्क 

पंजाब के औद्योगिक शहर मंडी गोबिंदगढ़ में एक बार फिर फर्जी बिलिंग और जीएसटी चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय ने करीब ₹3,089.57 करोड़ के कथित घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये के नकली लेन-देन दिखाकर सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया और अवैध धन को वैध बनाने के लिए बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग किया।

ईडी की लंबी जांच के बाद इस मामले में लुधियाना के थाना जमालपुर में पांच नामजद आरोपियों समेत कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों में अमित कुमार, मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल, गुरदीप सिंह और बलवंत सिंह के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी ने बैंक अधिकारियों और कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका को भी संदेह के घेरे में रखा है।

एफआईआर ईडी के दिल्ली मुख्यालय में तैनात डिप्टी डायरेक्टर सूरज कुमार यादव की शिकायत पर दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार, मंडी गोबिंदगढ़ में फर्जी कंपनियों के माध्यम से जीएसटी चोरी का खेल लंबे समय से चल रहा था। इससे पहले भी जीएसटी विभाग, सीजीएसटी, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियां कई मामलों में कार्रवाई कर चुकी हैं। हालांकि इस बार सामने आया नेटवर्क कहीं अधिक व्यापक और संगठित बताया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न फर्जी कंपनियों द्वारा केवल कागजी लेन-देन दिखाकर करोड़ों रुपये के बिल जारी किए जा रहे थे। वास्तविक रूप से कोई माल खरीदा या बेचा नहीं जा रहा था, लेकिन दस्तावेजों में बड़े स्तर पर व्यापार दर्शाकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लिया जा रहा था। इस तरीके से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

मामले की जांच तब तेज हुई जब केंद्र सरकार के बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स तथा जीएसटी इंटेलिजेंस से जुड़े एडवांस डेटा एनालिटिक्स टूल्स ने संदिग्ध ट्रांजैक्शनों का एक पैटर्न पकड़ा। सॉफ्टवेयर द्वारा करोड़ों रिकॉर्ड्स का विश्लेषण करने पर सामने आया कि पंजाब की कई कंपनियां आपस में असामान्य मात्रा में लेन-देन कर रही हैं। जांच में यह भी पाया गया कि अधिकतर मामलों में केवल बिलिंग हो रही थी जबकि वास्तविक व्यापार का कोई प्रमाण नहीं था।

इसके बाद केंद्रीय एजेंसियों ने संबंधित कंपनियों के जीएसटी रजिस्ट्रेशन, पैन और आधार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। अलग-अलग नामों से संचालित कई कंपनियों के रिकॉर्ड में एक ही मोबाइल नंबर, एक ही ईमेल आईडी और एक ही कार्यालय का पता दर्ज पाया गया। इससे एजेंसियों को विश्वास हो गया कि यह कोई सामान्य कारोबारी गतिविधि नहीं बल्कि सुनियोजित फर्जीवाड़ा है।नामों से संचालित कई कंपनियों के रिकॉर्ड में एक ही मोबाइल नंबर, एक ही ईमेल आईडी और एक ही कार्यालय का पता दर्ज पाया गया। इससे एजेंसियों को विश्वास हो गया कि यह कोई सामान्य कारोबारी गतिविधि नहीं बल्कि सुनियोजित फर्जीवाड़ा है।

Published on: 20 Jun 2026

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Ramesh Mahendru
editor@bigbossindiatoday.com
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