विधायक रमन अरोड़ा की सत्ता में वापसी से हलचल तेज,कई प्रकार की चर्चाओं ने लिया जन्म
पंजाब सरकार ने ही रमन अरोड़ा पर करवाई थी विजिलेंस रेड, भ्रष्टाचार केस में गये थे जेल
जालन्धर - एस एन एन
आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थामने के कारण पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में बनी भगवंत सिंह मान की सरकार मुश्किल में नजर आ रही है। उधर आप का दामन छोड़ने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्डा द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि पंजाब में आप के 92 विधायकों में से 60 -65 विधायक हमारे सम्पर्क में है जोकि आप सरकार के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो पंजाब में आप की सरकार तो टूट सकती है या फिर केन्द्र सरकार द्वारा पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है और पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव समय से पूर्व करवाए जा सकते है । उधर भारतीय जनता पार्टी भी पंजाब मे अपनी सरकार बनाने को आतुर नजर आ रही है।
राजनीतिक गलियारों की बात करें तो पंजाब सरकार ने अपने वर्चस्व को बचाने के लिए अपने ही कई विधेयकों व मंत्रियों को खुश करने का प्रयास किया बताया जा रहा है। विशेषतौर पर बुलाए गए विधानसभा सत्र में आप ने अपने ही विधायकों को टटोलने का प्रयास किया है, उसी कारण ही विधायक रमन अरोड़ा को एक वर्ष पूर्व वापिस ली गई सिक्यरिटी वापिस कर दी है। उधर पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक है और आम आदमी पार्टी पंजाब में दूसरी बार सत्ता पर काबिज होना चाहती है।
जालन्धर सैंट्रल विधानसभा क्षेत्र से विधायक रमन अरोड़ा की सत्ता में वापसी के बाद राजनीतिक हलचल काफी तेज हो चुकी है। पंजाब सरकार ने 12 मई 2025 को रमन अरोड़ा से सिक्योरिटी वापिस ले ली थी और 23 मई 2025 को भ्रष्टाचार के केस में विजिलेंस रेड करवा कर जेल भिजवा दिया था। जबकि रमन अरोड़ा अभी भी हाईकोर्ट से जमानत पर है। इनके साथ इनके बेटे राजन अरोड़ा, समधी राजू मदान,बिल्डिंग इंस्पेक्टर हरप्रीत कौर व व्यापारी मुखीजा को भी केस में शामिल किया गया था।
पंजाब में विधानसभा सत्र शुरू होने से पूर्व रमन अरोड़ा को पुलिस सिक्यरिटी का वापिस मिलने के कारण कई प्रकार की चर्चाओं ने जन्म ले लिया है। हालांकि विधायक रमन अरोड़ा के पास पहले सबसे अधिक 14 पुलिस कर्मी थे जबकि अब 4 पुलिस कर्मियों सहित एक जिप्सी मिली बताई जा रही है।
राजनीतिक में कब राजनेताओं की दोस्ती दुश्मनी में बदल जाए या फिर कब यह दुश्मन दोस्त बन जाए, इसका कुछ भी पता नहीं चलता। राजनिति एक शतरंज के खेल के सामान है यानि कि शह और मात का खेल है। इसमें तो खिलाड़ी निपुण होना चाहिए जो काबलियत रमन अरोड़ा मे स्पष्ट नजर आ रही है।
उधर यह भी चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि विधायक रमन अरोड़ा के जेल जाने के बाद जालन्धर के एक कुशल व्यापारी नितिन कोहली को जालन्धर सैंट्रल विधानसभा क्षेत्र का इंचार्ज बनाया गया था और वह भी जालन्धर की राजनिति में काफी एक्टिव भी हो चुके है ऐसे में विधायक रमन अरोड़ा की वापसी से नितिन कोहली का राजनिति में पीछे हट जाना मुमकिन नहीं लग रहा। यदि आम आदमी पार्टी रमन अरोड़ा को अगामी विधानसभा चुनावों मे अपना प्रत्याशी बनाते है तो नितिन कोहली का क्या होगा और यदि आप ने नितिन कोहली को अपना प्रत्याशी बनाया तो ऐसे में उनका चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। जबकि राजनीतिक पण्डितों का यह भी मानना है और चर्चाओं का बाज़ार इस बात को लेकर भी गर्म है कि जालन्धर सैंट्रल से भाजपा के पास कोई शक्तिशाली प्रत्याशी नहीं है और भाजपा नितिन कोहली को जालन्धर सैंट्रल से टिकट दे सकती है। इसका दूसरा कारण यह भी नजर आ रहा है कि नितिन कोहली को हल्का इंचार्ज बनवाने वाले व समर्थक अशोक मित्तल इस समय वह आप छोड़कर भाजपा ज्वाईन कर चुके है।
यह तो आने वाला कल ही बतायेगा कि जालन्धर सैंट्रल विधानसभा क्षेत्र की जनता किसके सिर पर विधायक का ताज पहनाती है।