Wednesday, 29 July 2026
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के नूरमहल आश्रम में श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के नूरमहल आश्रम में श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के नूरमहल आश्रम में श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

नूरमहल - नूपुर महेन्द्रू

युगद्रष्टा, ब्रह्मज्ञान प्रदाता एवं मानवता के आध्यात्मिक पथ-प्रदर्शक सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की पावन प्रेरणा एवं दिव्य मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के नूरमहल आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वश्री आशुतोष महाराज जी के ब्रह्मज्ञानी शिष्य-शिष्याओं द्वारा वैदिक मंत्रों के पवित्र उच्चारण से किया गया। मंत्रोच्चारण की दिव्य स्वर-लहरियों ने समूचे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सकारात्मकता से परिपूर्ण कर दिया। साध्वी तपस्विनी भारती जी ने मंच संचालन का शुभारंभ करते हुए उपस्थित पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिनंदन किया। कार्यक्रम के दौरान समस्त मानवता, विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और प्रत्येक प्राणी के कल्याण के लिए भावपूर्ण प्रार्थना का गायन किया गया। 

इसके उपरांत सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की दिव्य आरती एवं विधिवत पूजन संपन्न हुआ। प्रज्वलित दीपों की पवित्र ज्योति, सुगंधित पुष्पों की महक, भक्तिमय संगीत और हजारों श्रद्धालुओं के एकस्वर भाव ने ऐसा आध्यात्मिक दृश्य प्रस्तुत किया, मानो प्रत्येक हृदय में गुरु-भक्ति का दीप प्रज्वलित हो उठा हो।  

साध्वी वैष्णवी भारती जी ने अपने आध्यात्मिक प्रवचनों में कहा, “गुरु पूर्णिमा का यह उत्सव हमारे लिए एक कसौटी का कार्य करता है। यह हमें आत्ममंथन करने का अवसर देता है कि बीते 365 दिनों में क्या हम गुरु की आज्ञा में अडिग रहे? उन्होंने कहा कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल शब्दों, पुष्पों या बाहरी क्रियाओं तक सीमित नहीं होती। गुरु के प्रति वास्तविक समर्पण तब सिद्ध होता है, जब शिष्य उनके विचारों, मर्यादाओं और आध्यात्मिक सिद्धांतों को अपने आचरण में प्रकट करता है।

स्वामी मोहनपुरी जी ने कहा कि गुरु के वचनों को स्वीकार करना, उनके निर्देशों के अनुसार स्वयं को ढालना और जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में सत्य के पथ पर स्थिर रहना ही वास्तविक गुरु-पूजा है। शिष्य पूर्ण विश्वास के साथ गुरु के मार्ग पर चल पड़ता है, वह संसार की प्रशंसा, निंदा, विरोध अथवा परिस्थितियों की परवाह नहीं करता। 

साध्वी मानस्विनी भारती जी ने वर्तमान युग की परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा—“कुटिल चाल कलिकाल चल रहा, युग की गति पहचानो।” उन्होंने कहा कि आज के वर्तमान समय में कहीं देशों के बीच युद्ध और संघर्ष दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं प्रकृति एवं मौसम की असंतुलित गतिविधियाँ चिंता उत्पन्न कर रही हैं। सामाजिक मूल्यों में निरंतर गिरावट आ रही है । आत्मिक रूप से जागृत साधक परिस्थितियों से भयभीत या भ्रमित होने के स्थान पर सजग रहता है और अपने विवेक, साधना तथा गुरु के मार्गदर्शन के माध्यम से स्वयं को इनके प्रभाव से सुरक्षित रखता है।

स्वामी सज्जनानंद जी ने मंच संचालन को आगे बढ़ाते हुए नूरमहल आश्रम की आध्यात्मिक महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को आश्रम, सत्संग और गुरु-कार्य के साथ निरंतर जुड़े रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत पंजाबी भजन “सब ने भंगड़ा पाउणा” ने पूरे वातावरण को भक्तिमय उल्लास से भर दिया।

Published on: 29 Jul 2026

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Ramesh Mahendru
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