नशा मुक्त भारत अभियान के तहत यूनिवर्सिटी कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम
युवा पीढ़ी को नशों के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक नुकसान के बारे में जागरूक करना समय की बड़ी मांग - डा॰ नवजोत
जालंधर - एस एन एन
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी कॉलेज, लाडोवाली रोड, द्वारा ब्रह्माकुमारीज़ के सहयोग से आज ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे की लत के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक दुष्प्रभावों से अवगत करवाना तथा उन्हें स्वस्थ, शांतिपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नशों से दूर रहने का स्पष्ट संदेश देते हुए “नशों को ना और स्वस्थ जीवन को हाँ” का संदेश दिया गया। ब्रह्माकुमारीज़ के प्रतिनिधियों ने कहा कि नशों के खिलाफ लड़ाई केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और मजबूत सोच भी युवाओं को नशों तथा अन्य नकारात्मक प्रभावों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि युवावस्था जीवन का वह पड़ाव है, जहां सही निर्णय व्यक्ति के भविष्य की दिशा तय करते हैं। इसलिए युवाओं को स्वस्थ आदतें अपनाते हुए अपनी पढ़ाई, व्यक्तिगत विकास और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहना चाहिए।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कॉलेज के ओएसडी प्रो. (डॉ.) नवजोत ने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा नशा मुक्ति के संबंध में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नशों के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक नुकसान के बारे में जागरूक करना समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें सही मूल्यों, जिम्मेदारी की भावना और सकारात्मक सोच का विकास करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को सही दिशा, ज्ञान और मजबूत मानसिकता प्रदान की जाए तो वे नशों जैसी सामाजिक बुराइयों का डटकर मुकाबला कर सकते हैं और अपने साथ-साथ समाज को भी प्रगति की राह पर ले जा सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नशों के विनाशकारी प्रभावों से सचेत करते हुए आत्म-जागरूकता, सकारात्मक सोच, स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक मजबूती को नशा मुक्ति का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। विद्यार्थियों को अपने साथियों और समाज में नशों के खिलाफ जागरूकता फैलाने तथा एक स्वस्थ एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।