प्रियंका मोहिते 23 वर्षीय की मेहनत,लग्न, विश्वास व अटूट हौंसले की कहानी
दादा की खाकी वर्दी बनी प्रेरणा और यूपीएससी में रैंक 595
विशेष रिपोर्ट - रमेश महेन्द्रू
जीवन में सपने तभी पूरे होते हैं,जब आपके हौसले अटूट हो, मेहनत,लग्न और खुद पर विश्वास भी हो। कई बार रास्ते में असफलताएं, मुश्किलें और निराशा बार बार आती हैं, लेकिन जो लोग हार नहीं मानते, वही एक दिन इतिहास रचते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है आईपीएस अधिकारी प्रियंका मोहिते की, जिन्होंने महज 23 साल की उम्र में सिविल सेवा परीक्षा पास कर अपने परिवार का सपना साकार कर दिखाया।
प्रियंका के लिए यूपीएससी पास करना सिर्फ एक नौकरी हासिल करना नहीं था, बल्कि अपने दादा के अधूरे सपने और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना था। उनके दादा पुलिस विभाग में जमादार थे।(वर्तमान में यह पोस्ट हैड कांस्टेबल या सहेयक पुलिस नैरिक्षक) बचपन से दादा की ड्यूटी और ईमानदारी की कहानियां सुनते-सुनते प्रियंका के मन में भी एक दिन खाकी वर्दी पहनने का सपना जन्म ले चुका था।
इस सफर में कई ऐसे पल भी आए, जब उन्हें खुद पर संदेह हुआ, आंखों में आंसू और राह मुश्किल लगने लगी। लेकिन हर बार उनके माता-पिता ने उनका हौसला बढ़ाया और खुद पर भरोसा बनाए रखा। उसी भरोसे ने प्रियंका को आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने खुद से एक वादा किया कि एक दिन मैं भी खाकी वर्दी जरूर पहनूंगी। प्रियंका ने अपने इस वादे को सच कर दिखाया। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 595 हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा के लिए चयनित हुईं।
आईपीएस प्रियंका मोहिते का पैतृक गांव मालेगांव का पोहाणे है। उनके पिता सुरेश मोहिते एक स्कूल में शिक्षक हैं, उनकी बड़ी बहन एमबीबीएस हैं और मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं। वहीं, उनके भाई ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली है और वो भी यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं।
प्रियंका की शुरुआती पढ़ाई शिक्षा स्वामी मुक्तानंद स्कूल से हुई है और उसके बाद एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से उनका चयन खेडगांव के जवाहर नवोदय विद्यालय में हो गया। फिर उन्होंने कक्षा 6 से 12वीं तक नवोदय विद्यालय में ही पढ़ाई की। कक्षा 12वीं में उनका विषय साइंस था। लेकिन चूंकि उनका लक्ष्य यूपीएससी परीक्षा पास करना था। इसलिए प्रियंका आगे की पढ़ाई के लिए पुणे चली गईं, जहां उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में बीए और एमए किया। प्रियंका ने यूजीसी-नेट परीक्षा भी पास की है और उन्हें जूनियर रिसर्च फेलोशिप भी प्राप्त किया है।
प्रियंका यूपीएससी की परीक्षा मेंअपने पहले प्रयास में फेल हो गईं। हालांकि उन्होंने अपनी इस गलती से सीखा और फिर जमकर तैयारी की। उसके बाद उन्होंने दूसरा प्रयास दिया और न सिर्फ इंटरव्यू तक पहुंचीं बल्कि एग्जाम में सफल भी हुईं। उनका चयन आईपीएस अधिकारी के रूप में हुआ।
फिलहाल वह महाराष्ट्र कैडर में तैनात हैं। प्रियंका मोहिते की कहानी सिर्फ यूपीएससी में सफलता की नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, अनुशासन, संघर्ष, आत्मविश्वास और सपनों को हकीकत में बदलने की प्रेरक मिसाल है। यह कहानी हर उस युवा, खासकर हर बेटी को यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना पूरे करना असंभव नहीं है।